सामान्य ज्ञान

10 अक्टूबर को शनिश्चरी अमावस्या:मान्यताएं- सुबह शनि देव को चढ़ाएं तेल, पीपल के पास जलाएं दीपक; दोपहर में करें पितरों के लिए धूप-ध्यान

शनिवार, 10 अक्टूबर को सर्व पितृ मोक्ष अमावस्या है। आश्विन मास की इस तिथि पर पितृ पक्ष खत्म होता है। इस बार यह तिथि शनिवार को है, इसलिए यह शनिश्चरी अमावस्या है। सर्व पितृ मोक्ष अमावस्या और शनिवार के संयोग में किए गए धर्म-कर्म अक्षय पुण्य देते हैं, ऐसी मान्यता है। उज्जैन के ज्योतिषाचार्य पं. मनीष शर्मा के मुताबिक, इस दिन पितरों की तृप्ति के लिए किए गए कर्मों के साथ शनि ग्रह की अनुकूलता के लिए भी शुभ कर्म किए जा सकते हैं। इस अमावस्या पर केवल विधि-विधान से श्राद्ध करना ही नहीं, बल्कि सेवा और दान करना भी जरूरी है। छोटे बच्चों को खाना देना, जरूरतमंद की सहायता करना, रोगियों को दवाएं दान करना जैसे शुभ काम किए जा सकते हैं। दान-पुण्य के साथ ही गाय, कुत्ते और कौए को भोजन कराने की परंपरा भी पितृ कर्म से जुड़ी हुई है। कौए को पितरों का प्रतीक मानकर उसे भोजन कराया जाता है। श्राद्ध करने वाले व्यक्ति को बाहरी और आंतरिक शुद्धता बनाए रखनी चाहिए। क्रोध से बचना चाहिए, घर में शांति बनाए रखनी चाहिए। शनि के लिए कर सकते हैं ये शुभ काम जरूरी चीजें- गाय के गोबर से बने कंडे, धूप देने के लिए हवन कुंड या अन्य कोई बर्तन, घी, काले तिल, चावल, गुड़, कर्पूर, जल से भरा तांबे का लोटा, फूल, बैठने के लिए आसन। अगर ये सभी चीजें उपलब्ध न हो, तो जल, तिल, कंडे के अंगारे और गुड़-घी से भी श्रद्धापूर्वक पितरों का स्मरण करके धूप-ध्यान किया जा सकता है। आप चाहें तो खीर-पुड़ी भी बना सकते हैं। खीर-पुड़ी से भी धूप दिया जाता है।

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