रोचक तथ्य

राम नवमी विशेष

 राम नवमी विशेष

" सभी विकारों की औषधि है


मर्यादा पुरुषोत्तम की मर्यादा " 

मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्री राम का अवतरण दिवस चैत्र शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि पर उत्साह और उमंग के साथ मनाया जाता है । जैसी मर्यादा का भगवान श्री राम ने अपने जीवन में अनुपालन किया , वैसा ईश्वर के किसी अन्य अवतार में नहीं देखा गया । यही कारण है कि उन्हें " मर्यादा पुरुषोत्तम " के नाम से जाना गया । जीवन के प्रत्येक कठिन पथ पर चलते हुए भगवान श्री राम ने यही संदेश दिया है कि माता - पिता के वचन कभी टाले नहीं जाने चाहिए । अपने जीवन में उन्होंने प्राणी मात्र के प्रति जो स्नेह रखा वह भी अन्य अवतरणों में नहीं देखा गया । भाइयों के प्रति असीम प्रेम के साथ राज - पाठ को जीवन का आनंदोत्सव न मानने वाले प्रभु श्री राम ने चौदह वर्ष के वनवास को ऐसे स्वीकार किया मानो वह चौदह सेकंड की बात हो । कौशल्या माता के अलावा अपनी अन्य दो माताओं को उनके द्वारा दिया गया सम्मान उनकी आत्मा में समाई उस विचारधारा का सूचक है जो निर्मल मन और निः स्वार्थ परिवार के प्रति समर्पण को दर्शाता है । प्रभु श्री राम ने बालपन से लेकर राज तिलक तक अपनी नहीं बल्कि परिवार और अपनी प्रजा का ऐसा ख्याल रखा , जो आगे चलकर " रामराज " के रूप में प्रत्येक शासक के लिए एक बड़ा संदेश बन गया । 

आज राम नवमी के पावन पर्व पर हम चिंतन करें तो भगवान श्री राम तथा रामायण से जीवन और मानवीय समाज के उत्थान के  लिए बहुत कुछ सीखा जा सकता है । अपना जीवन , सोच - विचार , स्वभाव - व्यवहार आदि में सुधार करने का प्रयास राम चरित मानस के नित्य पठन - पाठन से किया जा सकता है । श्री राम और उनके आदर्शों पर लिखी गई राम चरित मानस में आए प्रेरक आदर्शों , शिक्षा , उपदेशों , मर्यादा पालन तथा जीवन मूल्यों के अंश मात्र को अपने जीवन में स्थान देकर बिखरते - टूटते , भोग - विलास के पाश में जकड़े परिवार को आदर्श के मार्ग पर प्रशस्त किया जा सकता है । वर्तमान में अनेक तरह की समस्याओं , दुःखों, कष्टों , चिंताओं , उलझनों , विवादों में पड़े मानवीय समाज को श्री राम और रामायण की पवित्र विचारधारा बड़ी औषधि के रूप में विकारों से छुटकारा दिला सकती है । हमें यह स्मरण रखना चाहिए कि केवल नाम लेने , पूजा - पाठ , आरती और जयकारा लगाने से ही जगत का कल्याण होने वाला नहीं है । हमें प्रभु श्री राम और रामायण के जीवन दर्शन को आचरण एवं व्यवहार में उतारने की प्रबल जरूरत है । हमें यह स्वीकार करना होगा कि आज मनुष्य की कथनी और करनी में जमीन - आसमान का अंतर स्पष्ट दिखाई पड़ रहा है ! आज मर्यादा पुरुषोत्तम के धार्मिक एवं संस्कारित देश में तेजी के साथ अधार्मिकता , अनैतिकता एवं राक्षसी प्रवृत्ति बढ़ रही है ! 

 

 हमारे भारतवर्ष का सौभाग्य रहा है कि इस देश में महान ऋषि - मुनि , संत - योगी , तपस्वी - त्यागी और बलिदानी महापुरुषों का जन्म हुआ । इस बात से कोई इनकार नहीं कर सकता कि महापुरुष ही किसी भी देश की अपार संपदा और विरासत के रूप में स्थापित होते हैं । मर्यादा पुरुषोत्तम प्रभु श्री राम भारतवंशियों के जन मानस में रोम - रोम और कण - कण में समाए हुए हैं । भारतीय संस्कृति में दशरथ नंदन रामलला की अमिट छाप रही है । सारे अवतारों में प्रभु श्री राम के अवतार को भारतवर्ष का आदर्श जीवन माना जाता है । वे हमारे जन - जीवन में धर्म भावना के प्रतीक रहे हैं । भगवान श्री राम के चरित्र में मर्यादोचित , मानवोचित और देवोचित गुणों का अथाह भंडार पाया जाता है । यही कारण है कि उन्हें  " मर्यादा पुरुषोत्तम " कहा गया । हमारे लिए कितने गौरव एवं अहंकार की बात है कि हमारे प्रभु श्री राम का चरित्र और आदर्श भारतवर्ष की सीमाओं से परे विदेशियों के लिए भी शांति , प्रेरणा और नव जीवन का आधार स्तंभ बनता जा रहा है । भगवान श्री राम के जीवन की महत्ता हमारी सांसों में समाने के बाद सांसों के रुक जाने पर भी बनी रहती है । यही कारण है कि हमारा जीवन समाप्त हो जाने के बाद हमें अग्नि को समर्पित करने के लिए श्मशान ले जाते समय भी श्री राम नाम का उच्चारण " राम नाम सत्य है , सत्य बोलो गत्य है .." के सहारे अगला जन्म संवारने का महामंत्र बन जाता है ! यह कहा जा सकता है कि भारतवर्ष का हिंदू समुदाय जन्म से लेकर मृत्यु तक श्री राम के साथ ही जीता और मरता है । 

 

आज पर्यंत प्रभु श्री राम जैसा चरित्र नायक दुबारा धरती पर जन्म नहीं ले पाया ! हमारे ग्रंथों के माध्यम से हमें ज्ञात होता है कि महामानव के सभी श्रेष्ठ गुण , धर्म और कर्म प्रभु श्री राम के चरित्र में विद्यमान रहे हैं । वे आदर्श पुत्र के साथी आदर्श भ्राता , आदर्श मित्र ,आदर्श पति , आदर्श शासक और दैवीय गुणों से परिपूर्ण मर्यादा पुरुषोत्तम , महापुरुष के रूप में स्थापित हुए । उनका संपूर्ण जीवन मर्यादा एवं कर्तव्य भावना से ओत - प्रोत रहा । हम गर्व से कह सकते हैं कि प्रभु श्री राम हम भारतीयों के रोल मॉडल रहे हैं । कई बार मैं यह सोचने लगता हूं कि जब विश्व के लोग प्रभु श्री राम और रामायण के जीवन आदर्शों को पढ़ते या सुनते होंगे तो बड़े आश्चर्य से यह कह उठते होंगे कि क्या ऐसी आदर्श प्रेरक घटनाएं इतिहास में कभी हुई होंगी ? हमें गर्व के साथ उन्हें बताना चाहिए कि श्री राम तथा रामायण भारतवर्ष के गौरवपूर्ण उच्च आदर्शों तथा उत्कर्षकाल के प्रामाणिक हस्ताक्षर रहे हैं । 

 

 हमारा सौभाग्य है कि हमने भारत भूमि में जन्म लिया और युग पुरुष प्रभु श्री राम के आदर्शों व जीवन मूल्यों की परंपराओं के उत्तराधिकारी कहलाने का अधिकार पा सके । आज जरूरत इस बात की है कि हम उनके प्रेरक आदर्श चरित्र से जीवन , परिवार , समाज और राष्ट्र के लिए कोई प्रेरणा , भावना , सुधार , निर्माण और संकल्प से खुद को बांधते हुए अपनी भूलों का परित्याग करने संकल्पित हों । आश्चर्य की बात है कि मर्यादा पुरुषोत्तम के व्यवहार और आचरण का अंश मात्र भी हमारे जीवन का हिस्सा नहीं बन पाया ! प्रभु श्री राम का प्रेरणादायी जीवन - दर्शन और रामायण के उच्चादर्श आज के भौतिकतावादी और भोगवादी जीवन के लिए अत्यंत उपयोगी और शिक्षाप्रद सिद्ध हो सकते हैं । हमारी भूली - भटकी मानव जाति को सन्मार्ग और प्रेरणा प्राप्त हो सकती है । यदि हम कृत संकल्पित होकर प्रभु श्री राम के आचरण को अंगीकार करने आगे आएं । हमारे लिए प्रभु श्री राम के आदर्श ही प्रकाश स्तंभ बन सकते हैं । 

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