छत्तीसगढ़ में राजकीय पक्षी के संरक्षण की योजना हुई धराशाई, रहस्यमयी मौतों के बाद अब आखरी पहाड़ी मैना ने भी तोड़ा दम
छत्तीसगढ़ के जगदलपुर शहर में बस्तरिया पहाड़ी मैना के संरक्षण की वन विभाग की महत्वाकांक्षी योजना ने अंततः असफलता का सामना किया है. यह पक्षी प्रजाति ध्वनि की हूबहू नकल करने की क्षमता रखती है और इसे छत्तीसगढ़ राज्य के राजकीय पक्षी के रूप में घोषित किया गया था. लेकिन इसके बाद से ही इसके संरक्षण और संवर्धन की योजना में कामयाबी नहीं हुई.
इस योजना के अंतर्गत वन विभाग ने जगदलपुर के वन विद्यालय में एक विशालकाय साल के वृक्ष में पिंजरे का निर्माण किया गया था, जिसमें डेढ़ दशक पहले पहाड़ी मैना रखी गई थी. इस परियोजना का उद्देश्य इस पक्षी की संख्या में वृद्धि करना था. हालांकि, वन विभाग को नर और मादा की पहचान का ज्ञान नहीं था और अनुभव की कमी के कारण यह परियोजना सफल नहीं हो सकी. इसके साथ ही, पर्याप्त सुरक्षा की अभावता के कारण एक मैना को सांप ने मार दिया.
दूसरी ओर, पिंजरे में रखी गई मैना की रहस्यमयी मौत नियमित रही है. इस परियोजना के बहुरूपी खर्च के बावजूद, यह प्रोजेक्ट अंततः असफलता का सामना कर रहा है. इस अवसर पर वन्यजीव प्रेमियों के बीच इस परियोजना के असफल होने की चर्चाएं हो रही हैं. लोगों का कहना है कि इस परियोजना ने पर्याप्त शोध के बजाय असफलता को जन्म दिया है. साथ ही, इस पूरे प्रोजेक्ट पर भ्रष्टाचार के आरोप भी लग रहे हैं. हाल ही में कांगेर घाटी राष्ट्रीय उद्यान के प्रबंधन ने विशेष प्रेस विज्ञप्ति जारी की थी जिसमें मैना की संख्या में वृद्धि का दावा किया गया था, लेकिन कुछ महीनों में नतीजे नकारात्मक साबित हो गए हैं.