विद्यार्थियों के निराशाजनक बीएससी अंतिम वर्ष के नतीजों पर एबीवीपी के बैनर तले विश्वविद्यालय घेरे
महासमुंद: पंडित रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय ने हाल ही में बीएससी अंतिम वर्ष के नतीजे घोषित किए गए हैं। इसके साथ ही, महासमुंद जिले के अन्य महाविद्यालयों में भी परिणाम जारी किए गए हैं। इसके बाद, महासमुंद जिला मुख्यालय के शासकीय पीजी कॉलेज के अंतिम वर्ष के छात्र-छात्राएं ने घोषित नतीजों पर नाराजगी जताते हुए विश्वविद्यालय को घेर लिया है। छात्रों ने एबीवीपी के बैनर तले विश्वविद्यालय परिसर का आक्रमण किया है और कुलपति को ज्ञापित किया है ताकि उन्हें अपनी समस्या के बारे में अवगत किया जा सके।
छात्र छात्राओं ने बताया कि प्रारंभिक रूप से देखा जाए तो महाविद्यालय में पढ़ने वाले बीएससी अंतिम वर्ष के छात्र-छात्राओं में एक ही विषय, अंग्रेजी, में पूरक प्राप्त हुए हैं। यह संभव नहीं हो सकता है। इससे छात्रों को निराश और हताश महसूस हो रहा है, और कई छात्र डिप्रेशन की समस्या से जूझ रहे हैं। यह सभी छात्र-छात्राएं कुलपति से मिलने आए और अपनी समस्याओं को साझा करने के लिए उन्हें ज्ञापित किया। वे अपने विषय में पूरी तरह से अंग्रेजी का पूरक परीक्षा देने के लिए अनुचित और अवैध मानते हैं। छात्र-छात्राएं ने भी बताया कि परीक्षा के दौरान कुछ तकनीकी समस्याएं भी हुईं, जो नतीजों में गड़बड़ी का कारण बन सकती हैं।
कुलपति ने छात्र-छात्राओं की समस्याओं को सुना और उनकी नाराजगी को समझा। उन्होंने छात्र-छात्राओं को आश्वासन दिया कि उनकी समस्याएं गंभीरता से देखी जाएंगी और जल्द से जल्द संशोधित की जाएंगी। उन्होंने विश्वविद्यालय के अधिकारियों को इस मामले की जांच के लिए तालियों को बुलाया और वादा किया कि सभी समस्याएं समय रहते हल की जाएंगी।
कुलपति ने छात्र-छात्राओं से यह भी कहा कि उन्हें शांत रहना चाहिए और न्यायाधीशों के निर्णय की प्रतीक्षा करनी चाहिए। वह इस मुद्दे को गंभीरता से लेते हुए विश्वविद्यालय के मानचित्र में सुधार करने का वादा किया। छात्र-छात्राओं की समस्याओं के समाधान के लिए उन्होंने एक कमेटी का गठन किया, जिसमें छात्र-छात्राएं, शिक्षकों, और विश्वविद्यालय के अधिकारी शामिल होंगे। इस कमेटी को छात्र-छात्राओं की समस्याओं का समाधान ढूंढने के लिए जिम्मेदारी सौंपी गई।
इस घटना के बाद, छात्र-छात्राएं अपने विश्वविद्यालय में परिवर्तन की उम्मीद कर सकते हैं। यह घटना एक महत्वपूर्ण संदेश भी देती है कि समस्याओं को उठाने और उन्हें हल करने के लिए विश्वविद्यालय नेतृत्व को सक्रिय रहना चाहिए।