छत्तीसगढ़ / रायपुर

महंत लक्ष्मीनारायण दास कॉलेज एवं विप्रो कला एवं शिक्षण महाविद्यालय में चल रही कार्यशाला का चतुर्थ दिवस


इंडियन एथिक्स से विद्यार्थियों को जोड़ना वर्तमान की महती आवश्यकता कुलपति आर पी दास केके एच मुक्त विश्वविद्यालय गुवाहाटी

टीचिंग जॉब चुनौती से परिपूर्ण प्रोफेसर एके श्रीवास्तव डायरेक्टर प्रबंध विभाग पंडित रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय रायपुर

रायपुर: महंत लक्ष्मीनारायण दास महाविद्यालय एवं विप्र कला एवं शिक्षण महाविद्यालय रायपुर के संयुक्त तत्वधान में शिक्षा शास्त्र और नई शिक्षा नीति पर चल रही कार्यशाला के चौथे दिन दो महत्वपूर्ण शिक्षा शास्त्रियों ने सहभागिता दी और मुख्य वक्ता के तौर पर अपने विचार रखें इसमें केके एच मुक्त विश्वविद्यालय गुवाहाटी में कुलपति प्रोफेसर आर पी दास ने मुख्य वक्ता के तौर पर चर्चा में कहा कि इंडियन एथिक्स को जानना वर्तमान युवा पीढ़ी की महत्वपूर्ण आवश्यकता है और इस कार्य में शिक्षक महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं इसलिए शिक्षकों को शैक्षणिक कार्यों के दौरान छात्र छात्राओं को मठ मंदिर मस्जिद गुरुद्वारा दरगाह इत्यादि स्थान पर ले जाकर प्रायोगिक तौर पर उसके महत्व को समझाना चाहिए ताकि विद्यार्थी एथिक्स को समझ सके यही नहीं उनका कहना था कि शिक्षक को पढ़ाते समय सेमिनार वर्कशॉप कांफ्रेंस के माध्यम से भी अन्य महत्वपूर्ण जानकारियों से छात्र छात्राओं को जुड़ने के लिए प्रेरित करना चाहिए क्योंकि आने वाला कल भारत को विश्व गुरु बनाने की दिशा में तेजी से अग्रसर हो सकेगा |

शिक्षक को टीचिंग और सिलेबस के महत्व को भी समझते हुए अध्ययन और अध्यापन की प्रक्रिया जारी रखनी चाहिए इसलिए प्रोफेसर दास ने कहा कि टीचिंग शिक्षा शास्त्र में बदलाव लाते हुए अध्यापन कार्य कराया जाना चाहिए उन्होंने कहा यह एक टीम स्पिरिट का कार्य है जिसे शिक्षक समझे और अपने अहम को त्याग कर शिक्षा में नई तकनीक का उपयोग शामिल करें यह सब बातें नई शिक्षा नीति में शामिल है लोकल फॉर्म व कल के कांसेप्ट को भी समझना होगा आयोजन में दूसरे प्रमुख वक्ता प्रोफेसर एके श्रीवास्तव अध्यक्ष प्रबंध विभाग पंडित रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय ने कहा इस कार्यशाला में मौजूद कई शिक्षक टीचर बाई चांस और टीचर बाय चॉइस हो सकते हैं |

ऐसे में यह समझना होगा कि जब आपकी से जुड़ते हैं तो आपके कार्य में अंतर होता है और जब आप आरुषि के कार्यों में जोड़ते हैं तो आपके कार्यों में अंतर होता है हर टीचर की एक पहचान होती है जिसे कायम करने के लिए कड़ी मेहनत करने की आवश्यकता है उन्होंने कहा कि टीचर को टीचर्स को तथ्यों के साथ अध्ययन और अध्यापन कार्य कराना चाहिए आज का वर्तमान युग मल्टीडिसीप्लिनरी शिक्षा का युग है जिससे विद्यार्थियों शिक्षकों को दोनों को जुड़ना होगा तभी महत्वपूर्ण जानकारी एक दूसरे से साझा कर पाएंगे उन्होंने कहा की शैक्षणिक कार्य चुनौती भरा हो गया है इसलिए हर शिक्षक को जानकारी से यूज़फुल होना होगा नई शिक्षा नीति है कहती है कि टीचर लेसन प्लान बनाकर अध्यापन अध्यापन कराएं ताकि विद्यार्थी तेजी से आत्मसात कर सकें इसमें प्रयोगात्मक बिंदुओं का भी उपयोग होना चाहिए तो और बेहतर हो सकेगा इसीलिए हर एक शिक्षक को अटेंशन और अट्रैक्शन पर अधिक जोर देना होगा तभी क्लास मजबूत और शानदार बन पाएगी

आयोजन मुख्य आयोजक महंत लक्ष्मीनारायण दास महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ देवाशीष मुखर्जी ने दोनों विद्वत गुरुजनों का परिचय कराया और कहा कि एक कार्यशाला काफी महत्वपूर्ण दिशा में आगे बढ़ रही है और सार मजबूत निकल कर सामने आएगा ऐसा उम्मीद की जा रही है और इस कार्यशाला का संक्षिप्त को भी एकत्रित कर एक पुस्तक के रूप में अवश्य महाविद्यालय सामने रखने की कोशिश करेगा ताकि यह जानकारी अन्य लोगों तक साझा हो सके 

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