रोचक तथ्य
गर्मियों में रहना है सेहतमंद तो पीएं नींबू पानी....
चाय और कॉफी के अलावा भी बहुत सी हेल्दी ड्रिंक्स हैं, जिनका गर्मियों में बिना किसी परेशानी के सेवन किया जा सकता है। अच्छी बात यह है कि ये सभी ड्रिंक्स चाय और कॉफी की तरह स्वादिष्ट हैं और शरीर को ऊर्जा देने और मूड को बेहतर बनाने का काम करती हैं। चलिए इनके बारे में जानते हैं-
दालचीनी और शहद, दोनों ही सेहत को फायदा देने वाले पोषक तत्वों से भरपूर होते हैं। इसलिए एक्सपर्ट्स इन दोनों को डाइट में शामिल करने की सलाह देते हैं। दालचीनी को उबाल लें और इस पानी में शहद मिलाकर पीएं। ऐसा करने से गैस और पेट फूलने की समस्या से राहत मिलेगी। इसके अलावा इन दोनों के एंटीबैक्टीरियल और एंटीऑक्सीडेंट गुण प्रतिरक्षा को मजबूत करने, बीमारी से बचाने और सामान्य स्वास्थ्य को बढ़ाने में मदद करते हैं।
गर्मियों के मौसम में नींबू पानी का सबसे ज्यादा सेवन किया जाता है। ये चाय और कॉफी का अच्छा और सस्ता विकप्ल है। नींबू पानी का सेवन करने से ब्लड प्रेशर नियंत्रित रहता है और वजन कम करने में भी ये मदद करता है। नींबू पानी गर्मियों में आपको तरोताजा रखने में भी मदद करेगा।
नारियल पानी में पोटेशियम, सोडियम और मैग्नीशियम जैसे इलेक्ट्रोलाइट्स से भरपूर होता है, जो गर्मियों में खोए हुए पोषक तत्वों की भरपाई करने में सहायता करते हैं। नारियल पानी में कैलोरी, वसा और कोलेस्ट्रॉल की मात्रा भी कम होती है और गर्मियों में ये आपको हाइड्रेटेड रखने में मदद करता है।
एलोवेरा तेल के लाभ: त्वचा, बाल और स्वास्थ्य के लिए प्रभावी उपचार
काफी लंबे समय से एलोवेरा तेल का उपयोग पुराने त्वचा रोगों, चोट, जलन, घाव, पेट संबंधित समस्याओं और कमजोर बालों के उपचार के लिए किया जा रहा है.
एलोवेरा तेल को घर पर खुद भी बनाया जा सकता है और इसके लिए बस आपको नारियल, जैतून या जोजोबा तेल को एलोवरा अर्क के साथ मिलाना होगा. आइए जानते हैं कि एलोवेरा तेल के उपयोग से क्या-क्या लाभ मिल सकते हैं.
चेहरे की रंगत निखारने में है सहायक
कई लोग त्वचा की रंगत को निखारने के लिए न जाने कितने महंगे-महंगे स्किन केयर प्रोडक्ट्स को अपनी दिनचर्या में शामिल कर लेते हैं, लेकिन फिर भी उन्हें इनसे मनचाहा परिणाम नहीं मिल पाता है. इससे अच्छा है कि इनकी बजाय आप एलोवरा तेल का उपयोग करें. एलोवेरा तेल में एलोसिन नामक यौगिक होता है, जो त्वचा की रंगत को सुधारने में मदद कर सकता है.
बालों का विकास करने में है प्रभावी
एलोवेरा तेल में कई ऐसे पोषक तत्व होते हैं, जो बालों के स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद हैं. इसमें विटामिन-D, विटामिन-E, आयरन, मैग्निशियम और प्रोटीन जैसे पोषक तत्व होते हैं, जो बालों के विकास और बालों से संबंधित समस्याओं से राहत दिलाने में मदद कर सकते हैं. नियमित रूप से इस तेल से सिर की मालिश करने से आपके बाल स्वस्थ और चमकदार बने रहते हैं.
स्ट्रेच मार्क्स को कर सकता है दूर
गर्भावस्था और वजन में उतार-चढ़ाव जैसे कई कारण हैं, जिनसे शरीर पर स्ट्रेच मार्क्स के निशान उभर आते हैं, लेकिन एलोवेरा तेल इन्हें भी दूर कर सकता है. एक अध्ययन के मुताबिक, अच्छी तरह से नमीयुक्त और हाइड्रेट त्वचा स्ट्रेच मार्क्स के निशान को कम करने मदद कर सकती है और एलोवेरा तेल मॉइस्चराइजिंग और हाइड्रेटिंग गुणों से भरपूर होता है.
त्वचा को भरपूर नमी प्रदान करने में है सहायक
रूखी त्वचा के लिए भी एलोवेरा तेल का उपयोग करना बेहद लाभदायक हो सकता है क्योंकि इसमें मौजूद फैटी एसिड त्वचा को मॉइस्चराइज करने में मदद कर सकते हैं. अगर आप रूखी त्वचा के साथ-साथ फटी एड़ियों के खुरदरेपन को ठीक करना चाहते हैं तो इससे राहत पाने के लिए आप एलोवेरा तेल का उपयोग कर सकते हैं. यकीनन यह आपकी समस्या को झट से ठीक कर देगा.
मच्छर के काटने का बन सकता है उपचार
एलोवेरा तेल में एंटी-इंफ्लेमेटरी, एंटी-सेप्टिक और एनाल्जेसिक गुण होते हैं.ये सभी गुण मच्छर के काटने से होने वाले दर्द, सूजन और जलन से राहत दिलाने में सहायक हो सकते हैं. लाभ के लिए प्रभावित हिस्से पर एलोवेरा तेल लगाएं और इस प्रक्रिया को दिन में लगभग 3-4 बार दोहराएं. इससे आपको जल्दी आराम मिल सकता है.
फेसबुक और इंस्टाग्राम की सेवाएं अचानक ठप हो गईं: साइबर अटैक का संभावित कारण
मेटा के अंतर्गत आने वाला सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म फेसबुक और इंस्टाग्राम आज अचानक से ठप पड़ गए. यह सर्विसेज केवल भारत में ही नहीं बल्कि दुनियाभर में डाउन रही. Facebook में यूजर्स को लॉग इन करने में लोगों को दिक्कत आई.
वहीं जिन यूजर्स का पहले से ही फेसबुक लॉग इन था, उनके सेशन अचानक एक्सपायर हो गए थे. इसके साथ ही इंस्टाग्राम में डाउन हो गया. जिससे यूजर्स परेशान हो गए और एक्स पर #facebookdown और #instagramdown ट्रेंड करने लगा.
साइबर एक्सपर्ट के मुताबिक ये DDOS अटैक भी हो सकता है. ऐसे अटैक्स में बहुत सारे लोग एक साथ सर्वर पर लॉगिन करने की कोशिश करते है जो उसकी क्षमता से ज्यादा होता है. इसमें ज्यादातर फेक यूजर होते है. कम्प्यूटर रोबेटे से यह बनाए जाते है BOTS कहते है.
कॉटन कैंडी: बच्चों को खिलाने से पहले जानें इसके नुकसान
कॉटन कैंडी एक ऐसी चीज होती है, जिसे देखकर बच्चे तो बच्चे बड़ो का भी खाने को जी चाहता है. वहीं पेरेंट्स भी अक्सर बच्चों को बाहर घूमने जाने पर दिलवा ही देते हैं, लेकिन अगर आप अपने बच्चों की सेहत को लेकर जागरुक हैं तो कॉटन कैंडी खाने और अपने बच्चों को खिलाने से पहले एक बार इसके नुकसान जरूर जान लें.
दरअसल, पुडुचेरी राज्य में कॉटन कैंडी की बिक्री पर प्रतिबंध लगा दिया गया है. इसके उत्पादन में एक खतरनाक रसायन, रोडामाइन-बी मिला है, जो हमारी बॉडी के लिए बहुत ज्यादा खतरनाक है. आज हम आपको बताएंगे कि रोडामाइन बी क्या है, और हमारी बॉडी में इसका क्या असर पड़ता है.
कॉटन कैंडी क्या है?
कॉटन कैंडी को ‘फेयरी फ्लॉस’ भी कहा जाता है और ‘बुड्ढी के बाल’ के नाम से भी जानते हैं. यह एक पारंपरिक मिठाई है जो कई जगहों पर उपलब्ध है. कॉटन कैंडी एक प्रकार की स्पन शुगर है जो कई देशों में लोकप्रिय है. इसे चीनी की चाशनी से बनाया जाता है, फिर एक छोटे छेद के माध्यम से घुमाया जाता है, जिसे एक छड़ी पर इकट्ठा किया जाता है और फिर कॉटन कैंडी के रूप में परोसा जाता है. अलग-अलग रंगों में बनी यह डिश बड़े स्वाद से खाई जाती है और वजन में भी काफी हल्की होती है.
रोडामाइन बी
यह एक कैमिकल है इसका उपयोग डाई के तौर पर किया जाता है, लेकिन अगर इसे खाने में मिलाया जाता है तो शरीर में पहुंचकर एक एंजाइटी और बैचेनी को पैदा करता है. इतना ही नहीं अगर आप लंबे समय तक इसका सेवन करते हैं तो इससे कैंसर और लीवर इंफैक्शन जैसी समस्याओं का सामना भी करना पड़ सकता है.
कॉटन कैंडी खाने के नुकसान
- कॉटन कैंडी में मौजूद उच्च शर्करा सामग्री ब्लड शुगर के स्तर को तेजी से बढ़ा सकती है, जिससे सक्रियता और इससे उत्पन्न ऊर्जा की मात्रा बढ़ जाती है. इससे बच्चों का मूड लगातार बदलता रहता है और वे चिड़चिड़े हो जाते हैं.
- इसके अधिक सेवन से वजन बढ़ सकता है. इतना ही नहीं इस कॉटन कैंडी में मौजूद मिठास दांतों के स्वास्थ्य पर हानिकारक प्रभाव के कारण दांत दर्द और दांतों में सड़न के साथ-साथ बचपन में मोटापे का खतरा भी बढ़ा सकती है.
- कॉटन कैंडी में आवश्यक पोषक तत्वों की कमी होती है. इसलिए बार-बार सेवन से बच्चे के आहार में पोषक तत्वों की कमी हो सकती है, जिससे संभावित पोषण संबंधी कमी हो सकती है. इसके अतिरिक्त, कॉटन कैंडी में अक्सर उपयोग किए जाने वाले कृत्रिम रंग और स्वाद संवेदनशील बच्चों में एलर्जी का कारण बन सकते हैं.
"लीप ईयर और उसकी महत्वपूर्णता: समय और कैलेंडर के रहस्य"
4 साल के अंतराल पर लीप ईयर आता है, यानी जिस साल में फरवरी माह में 29वां दिन होता है. आज 29 फरवरी है. चार साल में एक बार आने वाले इस दिन की अपनी खासियत भी है. इस साल 365 की जगह 366 दिन होंगे. लीप ईयर हर चार साल में एक बार आता है और साल में एक एक्स्ट्रा दिन फरवरी में जुड़ जाता है. लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि हर चार साल में ही क्यों आता है लीप ईयर और इस दौरान फरवरी के महीने में ही क्यों जुड़ जाता है एक दिन? तो आइए जानते हैं.
कैसे हुई लीप ईयर की शुरुआत?
यह तो हम सब जानते हैं कि पृथ्वी सूरज की परिक्रमा करती है. और इसे एक चक्कर पूरा करने में एक साल का समय लगता है. इसी बीच दिन से रात होती है और मौसम भी बदलते हैं. इस चक्कर को पूरा करने में पृथ्वी को 365 दिन, 5 घंटे, 48 मिनट और 46 सेकंड का समय लगता है. हालांकि, कैलेंडर ईयर में इस समय को 365 दिन और 6 घंटे माना जाता था. सोलर ईयर और कैलेंडर ईयर के दिनों के अंतर को कम करने के लिए 4 सालों तक हर साल 6 घंटे जुड़ते हैं. इसलिए चार साल में एक बार ही लीप ईयर आता है, जिसमें एक दिन जुड़ जाता है यानी 366 दिन होते हैं. और इसे ही लीप ईयर कहा जाता है.
फरवरी में ही क्यों जुड़ता है एक दिन?
दरअसल, जूलियन कैलेंडर में दिसंबर की जगह फरवरी का महीना आखिरी माना जाता था. इसी वजह से एक अतिरिक्त दिन फरवरी के महीने में ही जोड़ा जाता था.
ऐसे शुरू हुआ ग्रेगोरियन कैलेंडर
16वीं शताब्दी में पोप ग्रेगरी-8 ने बताया कि अतिरिक्त समय की वजह से सोलर ईयर और कैलेंडर ईयर के बीच में 10 दिन का अंतर आ गया है. उन्होंने जूलियन कैलेंडर में बदलाव करते हुए 24 फरवरी 1582 में 10 दिनों को कम कर दिया था. आज हम जो कैलेंडर यूज करते हैं उसका नाम इन्हीं के नाम पर रखा गया- ‘ग्रेगोरियन कैलेंडर’. हालांकि, उनका यह आइडिया समय को एडजस्ट करने में नाकाम रहा था.
लीप ईयर का होना क्यों जरूरी है?
ग्रेगोरियन कैलेंडर की शुरुआत जह बुई तो उसके चार साल बाद पहली बार लीप ईयर मनाया गया. अगर हर 4 साल में लीप ईयर न फॉलो किया जाए, तो हम समय चक्र से आगे निकल जाएंगे. चार साल में एक अतिरिक्त दिन अगर कैलेंडर में शामिल किया जाए, तो सौ साल के बाद हम 25 दिन आगे हो जाएंगे. अगर ऐसा होता है तो मौसम में बदलाव का भी पता नहीं चल पाएगा.
"16,000 फीट की ऊंचाई से गिरा आईफोन, बिना किसी नुकसान के बराबर पाया गया"
iPhone के फीचर्स को लेकर अक्सर आपने कई खबरें पढ़ी होंगी, आज ड्यूरेबिलिटी को लेकर बड़ी जानकारी सामने आई है. दरअसल, 16 हजार फीट की ऊंचाई पर उड़ते हुए जहाज से एक iPhone अचनाक बाहर चला गया. जब उसे खोजा गया, तो वह एकदम ठीक था. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, आईफोन की कंडिशन एकदम ठीक है. इसको लेकर फोटो भी सामने आई हैं. फोटो देखकर पता चलता है कि उस आईफोन पर एक भी स्क्रैच नहीं आया है.
iPhone की ड्यूरेबिलिटी
अभी तक आपने आईफोन के कैमरा और फीचर्स को लेकर उसकी वाहवाही सुनी होगी. लेकिन आज आफोन की ड्यूरेबिलिटी को लेकर भी आप उसकी तारीफ करते नहीं थकेंगे.
दरअसल, आसमान में 16 हजार फीट की ऊंचाई पर उड़ते हुए प्लेन से एक iPhone बाहर गिर जाता है. जब इस फोन को ढूंढा गया तो डिवाइस बिलकुल सही निकला. फोन में एक स्क्रैच भी सामने नहीं आया है.
"व्हाट्सएप यूजर्स को मिलेगा 15GB क्लाउड स्टोरेज, लेकिन बदलेगा नियम: जानें नए अपडेट के बारे में"
व्हाट्सएप यूज करने वाले यूजर्स को अभी तक व्हाट्सऐप की सभी सर्विस बिल्कुल मुफ्त मिल रही है. व्हाट्सएप दुनिया का सबसे लोकप्रिय और सबसे ज्यादा इस्तेमाल किया जाने वाला मैसेंजिंग प्लेटफॉर्म है, इसलिए इस ऐप का इस्तेमाल दुनियाभर के करोड़ों-अरबों लोग कर रहे हैं. व्हाट्सएप भी अपने यूजर्स के एक्सप्रीरियंस को दिन-प्रतिदिन बेहतर बनाने के लिए अपने ऐप में नए बदलाव और नए नियम लागू करता रहता है.
फ्री मिलती है 15GB क्लाउड स्टोरेज
Google Drive पर यूजर्स को फ्री 15GB क्लाउड डेटा एक्सेस करने को मिलता है. मौजूदा समय में, व्हाट्सएप यूजर्स चाहें जितना भी बैकअप तैयार कर लें, उसकी वजह से 15GB फ्री डेटा पर कोई डेंट नहीं आता है. यह नियम इस साल से बदल जाएगा. हालांकि बदलाव की कोई तारीख तय नहीं की है.
अब 15GB क्लाउड स्टोरेज में होगी काउटिंग
दरअसल, अगर व्हाट्सएप एंड्रॉयड यूजर्स ज्यादा बैकअप को क्लाउड स्टोरेज में सेव करते हैं, तो वह 15GB डेटा में काउंट होगा. ऐसे में यूजर्स अपनी चैट बैकअप को स्मार्ट तरीके से हैंडल करना होगा और गैर जरूरी कंटेंट को डिलीट भी करना होगा.
Google One सब्सक्रिप्शन लेना होगा
- अगर गूगल ड्राइव में पर्याप्त जगह है और आपका काम 15GB तक स्टोरेज में चल रहा है तो कोई बदलाव करने की जरूरत नहीं है. ऐसा ना होने की स्थिति में आपको Google One सब्सक्रिप्शन लेना होगा.
- सबसे पहले one.google.com पर जाएं और अपने Gmail अकाउंट से लॉगिन करें.
- अब आपको कई प्लान्स दिखाए जाएंगे, जिनमें से चुनना होगा.
- 100GB स्टोरेज ऑफर करने वाले बेसिक प्लान की कीमत भारत में 130 रुपये प्रतिमाह है.
- इसके अलावा 200GB स्टोरेज के लिए हर महीने 210 रुपये चुकाने होंगे.
- आप 2TB स्टोरेज वाले प्रीमियम प्लान के लिए हर महीने 650 रुपये भी खर्च कर सकते हैं.
"WhatsApp के चमत्कार: जो चैटिंग के अलावा भी कर सकते हैं ये 6 काम"
WhatsApp दुनिया के सबसे ज्यादा इस्तेमाल होने वाले मैसेजिंग प्लेटफॉर्म में से एक है. इंडिया जैसे देशों में लोग मैसेज, फोटो और वीडियो भेजने के लिए इसका इस्तेमाल करते हैं. वॉट्सऐप को हम केवल चैटिंग या मैसेज भेजने वाले प्लेटफॉर्म के तौर पर देखते हैं. हालांकि, ये इंस्टेंट मैसेजिंग प्लेटफॉर्म चैटिंग और मैसेज के अलावा भी कई तरह काम कर सकता है. इसलिए मेटा के सोशल मीडिया को सिर्फ चैटिंग तक ना आंके, क्योंकि ये आपके कई कामों को चुटकियों में निपटा सकता है. अमेरिकी टेक कंपनी ने वॉट्सऐप में कई शानदार फीचर्स दिए हैं, ताकि लोगों के एक्सपीरियंस को बेहतर किया जा सके. इस प्लेटफॉर्म में कंपनी ने पेमेंट और ई-कॉमर्स समेत कई सर्विस को जोड़ा है. आज हम आपको बता रहे हैं कि फ्रेंड्स और फैमिली के साथ चैटिंग करने के अलावा आप वॉट्सऐप से और क्या कर सकते हैं.
कैब कर सकते हैं बुक
यदि आपके पास उबर ऐप इंस्टॉल नहीं है, तो भी आप मैसेजिंग प्लेटफॉर्म के साथ उबर की साझेदारी की बदौलत वॉट्सऐप के जरिए आसानी से कैब बुक कर सकते हैं. आप एड्रेस टाइप या पिन किए बिना, उबर को अपना रियल टाइम लोकेशन भेजकर अपना सटीक पिकअप लोकेशन सेट कर सकते हैं.
बुक करें मेट्रो टिकट
WhatsApp पर मेट्रो टिकट बुक करने के लिए पहले +91 9650855800 नंबर पर Hi लिखकर भेजें. इसके बाद अपनी लैंग्वेज चुनें, उसके बाद Buy Ticket के ऑप्शन का चुनाव करें. फिर एक नया मैसेज आएगा, जिसपर क्लिक करने से एक नई विंडो खुलेगी, जिसमें यूजर्स को अपने स्टेशन चुनने होंगे. इसमें सोर्स और डेस्टिनेशन स्टेशन को सिलेक्ट करना होगा. इसके बाद यूजर्स को 1 टिकट का अमाउंट नज़र आएगा. ध्यान रखें कि वॉट्सऐप की मदद से आप मैक्सिमम 6 टिकट खरीद सकते हैं. इसके बाद नीचे टोटल अमाउंट आ जाएगा, जिसकी आपको पेमेंट करनी होगी. पेमेंट करने के बाद आपको टिकट का मैसेज आ जाएगा, जिसे स्कैन करके आप मेट्रो में एंट्री और एग्जिट कर पाएंगे.
JioMart की मदद से कर सकते हैं खरीदारी
आप वॉट्सऐप की मदद से ग्रोसरी का सामान आर्डर कर सकते हैं. आप वॉट्सऐप पर JioMart के साथ खरीदारी कर सकते हैं. JioMart पर आप समानों की लिस्ट बनाकर प्रोडक्ट को जोड़ सकते हैं. आप वर्चुअल कार्ट में आइटम जोड़ सकते हैं, और वॉट्सऐप पे के साथ चेकआउट कर सकते हैं.
WhatsApp से डाउनलोड करें डॉक्यूमेंट
सबसे पहले आप 9013151515 मोबाइल नंबर को MyGov HelpDesk नाम से सेव कर लें. फिर वॉट्सऐप ओपन करके न्यू चैट के ऑप्शन पर जाएं. अब यूजर्स को MyGov HelpDesk चैट में नमस्ते या फिर Hi टाइप करना होगा. इस चैट में आपसे DigiLocker सर्विस को चुनने को कहा जाएगा. इसके बाद DigiLocker Services सेलेक्ट करें. अब चैटबोट आपसे DigiLocker अकाउंट के बारे में पूछेगा. इसके बाद 12 डिजिट वाला आधार नबंर से DigiLocker अकाउंट को लिंक और ऑथेंटिकेट करना होगा. ओटीपी के जरिए आपका मोबाइल नंबर रजिस्टर्ड हो जाएगा. अब चैटबोट लिस्ट में Digilocker अकाउंट के साथ लिंक डॉक्यूमेंट दिखेगा. इसमें डाउनलोड, टाइप, सेंड नंबर का ऑप्शन दिखेगा. इस तरह डाक्यूमेंट डाउनलोड करने के लिए उपलब्ध होगा.
वॉट्सएप से करें पैसे ट्रांसफर
फ्रेंड्स और फैमिली के बीच लेनदेन के लिए वॉट्सऐप काफी बढ़िया प्लेटफॉर्म है. अगर आपने WhatsApp Payments वॉलेट के साथ बैंक अकाउंट लिंक किया है तो आसानी से UPI पेमेंट कर सकते हैं. इस सर्विस का इस्तेमाल फ्री में किया जा सकता है.
"Disney+Hotstar ने आईसीसी वनडे विश्व कप 2023 के फाइनल मैच के दौरान ग्लोबल लाइव स्ट्रीमिंग रिकॉर्ड बनाया"
डिज़्नी की वीडियो स्ट्रीमिंग सर्विस Disney+Hotstar ने 19 नवंबर को एक नया ग्लोबल लाइव स्ट्रीमिंग व्यूअरशिप रिकॉर्ड बनाया है. आईसीसी वनडे विश्व कप 2023 के फाइनल मैच के दौरान ऑस्ट्रेलिया का सामना किया. Disney+Hotstar ने 55 मिलियन दर्शकों तक पहुंच बनाई, जिसने 15 नवंबर को भारत बनाम न्यूजीलैंड सेमीफाइनल मैच के दौरान बनाए गए 53 मिलियन दर्शकों के पिछले रिकॉर्ड को पार कर लिया है. भारत के तेजी से बढ़ते स्ट्रीमिंग में मौजूदा मार्केट लीडर Disney+Hotstar पिछले एक महीने से लगातार रिकॉर्ड तोड़ रहा है.
इससे पहले भी टूट चुका है रिकॉर्ड
ये तीसरी बार हुआ है कि जब Disney+Hotstar पर लाइव क्रिकेट देखने का रिकॉर्ड टूटा है. इससे पहले भारत-पाकिस्तान के मैच को तीन करोड़ से ज्यादा लोगों ने हॉटस्टार पर लाइव देखा था. सेमीफाइनल में भी वीडियो स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म ने आज एक नया रिकॉर्ड बनाया जिसमें 5.3 करोड़ लोगों ने मैच को लाइव देखा. ये एक नया रिकॉर्ड कायम हुआ है, जिसमें 55 मिलियन दर्शकों ने मैच को लाइव देख रहे हैं.
Disney+Hotstar ट्विटर (X) पर सभी प्रशंसकों को धन्यवाद दिया, जिन लोगों ने डिज्नी प्लस हॉटस्टार पर भारत-ऑस्ट्रेलिया के फाइनल मैच को देखने के लिए एक साथ जुड़े रहे.
"WhatsApp ने भारत में सितंबर में 71 लाख से अधिक खातों पर प्रतिबंध लगाया, नए आईटी नियम 2021 के अनुपालन में"
मेटा के स्वामित्व वाले WhatsApp ने नए आईटी नियम 2021 के अनुपालन में सितंबर महीने में भारत में रिकॉर्ड 71 लाख से अधिक खराब खातों पर प्रतिबंध लगा दिया है. कंपनी ने 1 से 30 सितंबर के बीच 71,11,000 खातों पर प्रतिबंध लगाया है. WhatsApp ने अपनी मासिक अनुपालन रिपोर्ट में कहा कि इनमें से लगभग 25,71,000 खातों पर सक्रिय रूप से प्रतिबंध लगाया गया है.
बता दें की WhatsApp हर महीने यूजर सेफ्टी रिपोर्ट जारी करती है, जिसमें इस बात का पूरा ब्यौरा होता है कि कंपनी को यूजर्स से कितनी शिकायतें मिली हैं और उनपर क्या कार्रवाई की गई है. वॉट्सऐप ने इससे पहले अगस्त के महीने में देश में लगभग 74 लाख एकाउंट्स को बैन किया था. इनमें से लगभग 35 लाख एकाउंट्स को यूजर्स की ओर से रिपोर्ट नहीं मिलने के बावजूद ब्लॉक किया गया था.
WhatsApp को सितंबर महीने में 10,442 यूजर्स ने स्पैम को लेकर शिकायतें की थीं. अकाउंट सपोर्ट को लेकर 1,031, बैन करने को लेकर 7,396, प्रोडक्ट सपोर्ट को लेकर 370, सेफ्टी के लिए 127 और अदर सपोर्ट को लेकर 1,518 शिकायतें मिली थीं.
आपका भी अकाउंट हो सकता है बैन
2021 में नए आईटी नियम आने के बाद व्हाट्सएप हर महीने शिकायत अपील की रिपोर्ट जारी करता है. इसमें स्पैम, न्यूडिटी आदि को लेकर शिकायतें शामिल होती हैं. यदि आप भी अपने व्हाट्सएप अकाउंट से इस तरह की कोई भी गतिविधी करते हैं तो आपका भी अकाउंट बैन हो सकता है.
"महाराजा अग्रसेन: अग्रवाल समाज के जनक और उनके महत्वपूर्ण इतिहास का अध्ययन"
महाराजा अग्रसेन को श्रीराम का वंशज माना गया है. अश्विन माह के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि यानि शारदीय नवरात्रि के पहले दिन हर साल महाराजा अग्रसेन की जयंती (Agrasen Jayanti) मनाई जाती है. महाराज अग्रसेन, अग्रवाल अर्थात वैश्य समाज के जनक कहे जाते हैं. इन्होंने व्यापारियों के राज्य की स्थापना की थी यही वजह है कि अग्रसेन जी के जन्मोत्सव पर व्यापारी क्षेत्र से जुड़े लोग विधि विधान से उनकी पूजा करते हैं. आइए जानते हैं इस साल महाराजा अग्रसेन जयंती (Agrasen Jayanti) की डेट, मुहूर्त और उनसे जुड़ा इतिहास.
महाराजा अग्रसेन जयंती 2023
इस साल 15 अक्टूबर यानी आज महाराजा अग्रसेन जी की जयंती (Agrasen Jayanti) मनाई जाएगी. पंचांग के अनुसार अश्विन माह के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि 14 अक्टूबर 2023 को रात 11.24 मिनट पर शुरू होगी और अगले दिन 15 अक्टूबर 2023 को प्रात: 12.32 मिनट पर समाप्त होगी.
महाराजा अग्रसेन जी का इतिहास
अग्रसेन राजा वल्लभ सेन के सबसे बड़े पुत्र थे. कहा जाता हैं इनका जन्म द्वापर युग के अंतिम चरण में हुआ था, जिस वक्त राम राज्य हुआ करता था. इन्हें श्रीराम की 34वीं पीढ़ी कहा जाता है. गणतंत्र के स्थापक और अहिंसा के पुजारी महाराजा अग्रसेन की नगरी का नाम प्रतापनगर था. बाद में इन्होने अग्रोहा नामक नगरी बसाई थी.
महाराजा अग्रसेन ने क्यों त्यागा क्षत्रिय धर्म
अग्रसेन जी के जीवन के 3 आदर्श रहे हैं, एक लोकतांत्रिक शासन व्यवस्था, दूसरा आर्थिक समरूपता और तीसरा सामाजिक समानता. मनुष्यों के साथ पशु-पक्षियों से महाराजा अग्रसेन का अटूट लगाव था, इसी कारण उन्होंने यज्ञों में पशु की आहुति को गलत करार दिया और अपना क्षत्रिय धर्म त्याग कर वैश्य धर्म की स्थापना की इस प्रकार वे अग्रवाल समाज के जन्म दाता बने.
कैसे हुई अग्रवाल समाज की उत्पत्ति
महाराजा अग्रसेन ने राज्य के नागराज महिस्त कन्या सुंदरावती से दूसरा विवाह किया. जिससे उन्हें 18 पुत्रों की प्राप्ति हुई. कहते हैं मां लक्ष्मी ने राजा अग्रसेन को स्वप्न में आकर वैश्य समाज की स्थापना के लिए कहा था. राजा अग्रसेन ने वैश्य जाति का जन्म तो कर दिया, लेकिन इसे व्यवस्थित करने के लिए 18 यज्ञ हुए और उनके आधार पर गोत्र बनाये गए. अग्रसेन महाराज के 18 पुत्रों ने यज्ञ का संकल्प लिया. जिन्हें 18 ऋषियों ने पूरा करवाया. इन ऋषियों के आधार पर गोत्र की उत्त्पत्ति हुई, जिसने भव्य 18 गोत्र वाले अग्रवाल समाज का निर्माण किया गया.
मां लक्ष्मी से पाया आशीर्वाद
मान्यता है एक बार महाराजा अग्रसेन के राज्य में सूखा पड़ गया था, धन-अन्न के लाले पड़ गए थे. तब लक्ष्मी को प्रसन्न करने के लिए उन्होंने कठोर तप किया तो मां लक्ष्मी ने उन्हें साक्षात दर्शन दिए और धन वैभव प्राप्त करने का आशीर्वाद दिया.
ये है अग्रवास समाज के 18 गोत्र
बंसल, बिंदल, धारण, गर्ग, गोयल, गोयन, जिंदल, कंसल, कुच्छल, मधुकुल, मंगल, मित्तल, नागल, सिंघल, तायल, तिंगल, भंदल, ऐरन.
"विश्व डाक दिवस: दुनिया के सबसे ऊंचे पोस्ट ऑफिस के बारे में रोचक तथ्य"
हम सभी 21वीं सदी में जी रहे हैं. आज के समय में चीजें इतनी आसान हो गई हैं कि हमें बस मोबाइल स्क्रीन पर अपनी उंगली घुमानी है और हम अपने प्रियजनों का हाल-चाल जान सकते हैं और उन्हें मैसेज भी भेज सकते हैं. एक समय था जब चीजें इतनी आधुनिक नहीं थीं और एक-दूसरे का हाल-चाल जानने के लिए लोग या तो उनके घर जाते थे या उन्हें चिट्ठी भेजते थे. भले ही आज के समय में चिट्ठियां भेजने का चलन न के बराबर हो गया है. आज यानी 9 अक्टूबर को मनाया जाता है ” विश्व डाक दिवस”. और इस खास दिन पर हम लेकर आए हैं दुनिया का एक ऐसा डाकघर है जो पिछले कई सालों से लोगों के बीच आकर्षण का केंद्र बना हुआ है. आइए जानते हैं दुनिया के सबसे ऊंचे पोस्ट ऑफिस के बारे में.
यहां है दुनिया का सबसे ऊंचाई पर स्थित डाकघर
दुनिया का सबसे ऊंचा डाकघर हिमाचल प्रदेश के हिक्किम गांव में स्थित है. इसकी ऊंचाई समुद्र तल से 14567 फीट है, जिससे यह लोगों का ध्यान आकर्षित करता है. आपको जानकर हैरानी होगी कि आज भी लोग इस पोस्ट के जरिए चिट्ठी भेजते हैं. इस डाकघर की शुरवात 1983 में हुई थी.
लेटर बॉक्स का आकार
यहां रहने वाले लोग इस डाकघर से पत्र भेजते ही हैं साथ ही दूर-दूर से आने वाले पर्यटक यहां से चिट्ठी भेजते हैं. ऐसा माना जाता है कि यहां प्रतिदिन 300 से 400 पत्र भेजे जाते हैं. इस पोस्ट ऑफिस का डिजाइन पर्यटकों का ध्यान अपनी ओर खींचता है. लेटर बॉक्स के आकार में चलने वाला यह डाकघर लोगों को खूब पसंद आ रहा है. पर्यटक यहां आकर सेल्फी लेते हैं. अब यह पर्यटकों की पसंदीदा जगह में भी शामिल हो गया है.
ऐसे पहुंच सकते हैं पोस्ट ऑफिस
विश्व के सबसे ऊंचे पोस्ट ऑफिस में आसानी से पहुंचा जा सकता है. जो ट्रेक करना पसंद करते हैं काज़ा से बस ले सकते हैं और मोटर योग्य सड़क के माध्यम से हिक्किम पहुंच सकते हैं. ध्यान रखें कि बस दिन में केवल एक बार दोपहर 2 बजे ही निकलती है.
कौन हैं रिनचेन चेरिंग?
रिनचेन चेरिंग इस पोस्ट ऑफिस में पोस्ट मास्टर के रूप में 30 से अधिक वर्षों से सेवा कर रहे हैं. वह इस डाकघर की स्थापना के बाद से 22 साल की छोटी उम्र में ही इस पोस्ट ऑफिस से जुड़ गए थे. केवल इसलिए क्योंकि वे एक फास्ट रनर थे और उनके पास एक साइकिल थी. पिछले 30 सालों से रिनचेन अकेले ही और बड़ी वफादारी से सभी काम कर रहे हैं.
कैसे पहुंचाया जाता है डाक?
हिक्किम पोस्ट ऑफिस ने 5 नवंबर 1983 से कार्य करना शुरू किया था और उसके बाद से ही रिनचेन चेरिंग वहां के पोस्टमैन बने हुए हैं. लोकल लोगों का कहना है कि सबसे पहले लेटर को काजॉ भेजा जाता है. उसके बाद लेटर रिकांग पियो जाता है और अंत में दिल्ली पहुंचता है. पहाड़ी गांव में स्थित होने के कारण इस पोस्ट ऑफिस तक पहुंचना आसान नहीं होता. लेकिन रिनचेन चेरिंग सभी मुश्किलों को पार कर चिट्ठियां लोगों तक पहुंचाते हैं.
"अछूत समस्या: भगत सिंह के विचार"
"समाज में समानता की दिशा में: अछूतों के साथ न्याय और समाजिक सुधार"
हमारे देश जैसे बुरे हालात किसी दूसरे देश के नहीं हुए. यहां अजब-अजब सवाल उठते रहते हैं. एक अहम सवाल अछूत-समस्या है. समस्या यह है कि 30 करोड़ की जनसंख्या वाले देश में जो 6 करोड़ लोग अछूत कहलाते हैं, उनके स्पर्श-मात्र से धर्मभ्रष्ट हो जाएगा! उनके मन्दिरों में प्रवेश से देवगण नाराज़़ हो उठेंगे! कुएं से उनके द्वारा पानी निकालने से कुआं अपवित्र हो जाएगा! ये सवाल बीसवीं सदी में किए जा रहे हैं, जिन्हें कि सुनते ही शर्म आती है.
हमारा देश बहुत अध्यात्मवादी है, लेकिन हम मनुष्य को मनुष्य का दर्जा देते हुए भी झिझकते हैं जबकि पूर्णतया भौतिकवादी कहलाने वाला यूरोप कई सदियों से इंकलाब की आवाज उठा रहा है. उन्होंने अमेरिका और फ्रांस की क्रान्तियों के दौरान ही समानता की घोषणा कर दी थी. आज रूस ने भी हर प्रकार का भेदभाव मिटाकर क्रान्ति के लिए कमर कसी हुई है. हम सदा ही आत्मा-परमात्मा के वजूद को लेकर चिन्तित होने तथा इस ज़ोरदार बहस में उलझे हुए हैं कि क्या अछूत को जनेऊ दे दिया जाएगा? वे वेद-शास्त्र पढ़ने के अधिकारी हैं अथवा नहीं? हम उलाहना देते हैं कि हमारे साथ विदेशों में अच्छा सलूक नहीं होता. अंग्रेजी शासन हमें अंग्रेजों के समान नहीं समझता. लेकिन क्या हमें यह शिकायत करने का अधिकार है?
सिन्ध के एक मुस्लिम सज्जन नूर मुहम्मद ने, जो बम्बई कौंसिल के सदस्य हैं, इस विषय पर ख़ूब कहा – “If the Hindu society refuses to allow other human beings, fellow creatures so that to attend public schools, and if…the president of local board representing so many lakhs of people in this house refuses to allow his fellows and brothers the elementary human right of having water to drink, what right have they to ask for more rights from the bureaucracy? Before we accuse people coming from other lands, we should see how we ourselves behave toward our own peoply… How can we ask for greater political rights when we ourselves deny elementary rights to human beings.”
वे कहते हैं कि जब तुम एक इंसान को पीने के लिए पानी देने से भी इंकार करते हो, जब तुम उन्हें स्कूल में भी पढ़ने नहीं देते तो तुम्हें क्या अधिकार है कि अपने लिए अधिक अधिकारों की मांग करो? जब तुम एक इंसान को समान अधिकार देने से भी इंकार करते हो तो तुम अधिक राजनीतिक अधिकार मांगने के कैसे अधिकारी बन गए?
बात बिल्कुल खरी है. लेकिन यह क्योंकि एक मुस्लिम ने कही है इसलिए हिंदू कहेंगे कि देखो, वह उन अछूतों को मुसलमान बनाकर अपने में शामिल करना चाहते हैं!
जब तुम उन्हें इस तरह पशुओं से भी गया-बीता समझोगे तो वह जरूर ही दूसरे धर्मों में शामिल हो जायेंगे, जिनमें उन्हें अधिक अधिकार मिलेंगे, जहां उनसे इंसानों जैसा व्यवहार किया जाएगा. फिर यह कहना कि देखो जी, ईसाई और मुसलमान हिंदू क़ौम को नुक़सान पहुंचा रहे हैं, व्यर्थ होगा.
कितना स्पष्ट कथन है, लेकिन यह सुनकर सभी तिलमिला उठते हैं. ठीक इसी तरह की चिन्ता हिन्दुओं को भी हुई. सनातनी पण्डित भी कुछ न कुछ इस मसले पर सोचने लगे. बीच-बीच में बड़े ‘युगान्तरकारी’ कहे जाने वाले भी शामिल हुए. पटना में हिन्दू महासभा का सम्मेलन लाला लाजपतराय – जोकि अछूतों के बहुत पुराने समर्थक चले आ रहे हैं – की अध्यक्षता में हुआ, तो ज़ोरदार बहस छिड़ी. अच्छी नोक-झोंक हुई. समस्या यह थी कि अछूतों को यज्ञोपवीत धारण करने का हक है अथवा नहीं? तथा क्या उन्हें वेद-शास्त्रों का अध्ययन करने का अधिकार है? बड़े-बड़े समाज-सुधारक तमतमा गये, लेकिन लाला जी ने सबको सहमत कर दिया तथा ये दो बातें स्वीकृत कर हिन्दू धर्म की लाज रख ली. वरना ज़रा सोचो, कितनी शर्म की बात होती. कुत्ता हमारी गोद में बैठ सकता है. हमारी रसोई में निःसंग फिरता है, लेकिन एक इंसान का हमसे स्पर्श हो जाये तो बस धर्म भ्रष्ट हो जाता है. इस समय मालवीय जी जैसे बड़े समाज-सुधारक, अछूतों के बड़े प्रेमी और न जाने क्या-क्या पहले एक मेहतर के हाथों गले में हार डलवा लेते हैं, लेकिन कपड़ों सहित स्नान किए बिना स्वयं को अशुद्ध समझते हैं! क्या ख़ूब यह चाल है! सबको प्यार करने वाले भगवान की पूजा करने के लिए मन्दिर बना है, लेकिन वहां अछूत जा घुसे तो वह मन्दिर अपवित्र हो जाता है! भगवान रुष्ट हो जाता है! घर की जब यह स्थिति हो तो बाहर हम बराबरी के नाम पर झगड़ते अच्छे लगते हैं? तब हमारे इस रवैये में कृतघ्नता की भी हद पायी जाती है. जो निम्नतम काम करके हमारे लिए सुविधाओं को उपलब्ध कराते हैं, उन्हें ही हम दुरदुराते हैं. पशुओं की हम पूजा कर सकते हैं, लेकिन इंसान को पास नहीं बिठा सकते.
आज इस सवाल पर बहुत शोर हो रहा है. उन विचारों पर आजकल विशेष ध्यान दिया जा रहा है. देश में मुक्ति-कामना जिस तरह बढ़ रही है, उसमें सांप्रदायिक भावना ने और कोई लाभ पहुंचाया हो अथवा नहीं, लेकिन एक लाभ ज़रूर पहुंचाया है. अधिक अधिकारों की मांग के लिए अपनी-अपनी क़ौम की संख्या बढ़ाने की चिन्ता सभी को हुई. मुस्लिमों ने ज़रा ज़्यादा ज़ोर दिया. उन्होंने अछूतों को मुसलमान बनाकर अपने बराबर अधिकार देने शुरू कर दिए. इससे हिन्दुओं के अहम को चोट पहुंची. स्पर्धा बढ़ी. फसाद भी हुए. धीरे-धीरे सिखों के बीच अछूतों के जनेऊ उतारने या केश कटवाने के सवालों पर झगड़े हुए. अब तीनों क़ौमें अछूतों को अपनी-अपनी ओर खींच रही हैं. इसका शोर-शराबा है. उधर ईसाई चुपचाप उनका रुतबा बढ़ा रहे हैं. चलो, इस सारी हलचल से ही देश के दुर्भाग्य की लानत दूर हो रही है.
इधर जब अछूतों ने देखा कि उनकी वजह से इनमें फसाद हो रहे हैं तथा उन्हें हर कोई अपनी-अपनी ख़ुराक समझ रहा है तो वे अलग ही क्यों न संगठित हो जायें? इस विचार के अमल में अंग्रेज़ी सरकार का कोई हाथ हो अथवा न हो, लेकिन इतना अवश्य है कि इस प्रचार में सरकारी मशीनरी का काफ़ी हाथ था. ‘आदि धर्म मण्डल’ जैसे संगठन उस विचार के प्रचार का परिणाम हैं.
अब एक सवाल और उठता है कि इस समस्या का सही निदान क्या हो? इसका जवाब बड़ा अहम है. सबसे पहले यह निर्णय कर लेना चाहिए कि सब इंसान समान हैं तथा न तो जन्म से कोई भिन्न पैदा हुआ और न कार्य-विभाजन से. अर्थात क्योंकि एक आदमी ग़रीब मेहतर के घर पैदा हो गया है, इसलिए जीवनभर मैला ही साफ़ करेगा और दुनिया में किसी तरह के विकास का काम पाने का उसे कोई हक़ नहीं है, ये बातें फ़िज़ूल हैं. इस तरह हमारे पूर्वज आर्यों ने इनके साथ ऐसा अन्यायपूर्ण व्यवहार किया तथा उन्हें नीच कहकर दुत्कार दिया एवं निम्नकोटि के कार्य करवाने लगे. साथ ही यह भी चिन्ता हुई कि कहीं ये विद्रोह न कर दें, तब पुनर्जन्म के दर्शन का प्रचार कर दिया कि यह तुम्हारे पूर्वजन्म के पापों का फल है. अब क्या हो सकता है? चुपचाप दिन गुज़ारो! इस तरह उन्हें धैर्य का उपदेश देकर वे लोग उन्हें लम्बे समय तक के लिए शान्त करा गए. लेकिन उन्होंने बड़ा पाप किया. मानव के भीतर की मानवीयता को समाप्त कर दिया. आत्मविश्वास एवं स्वावलम्बन की भावनाओं को समाप्त कर दिया. बहुत दमन और अन्याय किया गया. आज उस सबके प्रायश्चित का वक़्त है.
इसके साथ एक दूसरी गड़बड़ी हो गई. लोगों के मनों में आवश्यक कार्यों के प्रति घृणा पैदा हो गई. हमने जुलाहे को भी दुत्कारा. आज कपड़ा बुनने वाले भी अछूत समझे जाते हैं. कहार को भी अछूत समझा जाता है. इससे बड़ी गड़बड़ी पैदा हुई. ऐसे में विकास की प्रक्रिया में रुकावटें पैदा हो रही हैं.
इन तबकों को अपने समक्ष रखते हुए हमें चाहिए कि हम न इन्हें अछूत कहें और न समझें. बस, समस्या हल हो जाती है. नौजवान भारत सभा तथा कांग्रेस ने जो ढंग अपनाया है, वह काफ़ी अच्छा है. जिन्हें आज तक अछूत कहा जाता रहा, उनसे अपने इन पापों के लिए क्षमा-याचना करनी चाहिए तथा उन्हें अपने जैसा इंसान समझना, बिना अमृत छकाये, बिना कलमा पढ़ाये या शुद्धि किए उन्हें अपने में शामिल करके उनके हाथ से पानी पीना, यही उचित ढंग है. और आपस में खींचतान करना और व्यवहार में कोई भी हक़ न देना, कोई ठीक बात नहीं है.
जब गांवों में मज़दूर-प्रचार शुरू हुआ, उस समय किसानों को सरकारी आदमी यह बात समझाकर भड़काते थे कि देखो, ये भंगी-चमारों को सिर पर चढ़ा रहे हैं और तुम्हारा काम बन्द करवायेंगे. बस किसान इतने में ही भड़क गए. उन्हें याद रहना चाहिए कि उनकी हालत तब तक नहीं सुधर सकती जब तक कि वे इन ग़रीबों को नीच और कमीना कहकर अपनी जूती के नीचे दबाये रखना चाहते हैं. अक्सर कहा जाता है कि वे साफ़ नहीं रहते. इसका उत्तर साफ़ है – वे ग़रीब हैं. ग़रीबी का इलाज करो। ऊंचे-ऊंचे कुलों के ग़रीब लोग भी कोई कम गन्दे नहीं रहते. गन्दे काम करने का बहाना भी नहीं चल सकता, क्योंकि माताएं बच्चों का मैला साफ़ करने से मेहतर तथा अछूत तो नहीं हो जातीं.
लेकिन यह काम उतने समय तक नहीं हो सकता जितने समय तक कि अछूत क़ौमें अपनेआप को संगठित न कर लें. हम तो समझते है कि उनका स्वयं को अलग संगठनबद्ध करना तथा मुस्लिमों के बराबर गिनती में होने के कारण उनके बराबर अधिकारों की मांग करना बहुत आशाजनक संकेत है. या तो साम्प्रदायिक भेद का झंझट ही ख़त्म करो, नहीं तो उनके अलग अधिकार उन्हें दे दो. कौंसिलों और असेम्बलियों का कर्त्तव्य है कि वे स्कूल-कॉलेज, कुएं तथा सड़क के उपयोग की पूरी स्वतन्त्रता उन्हें दिलायें. ज़बानी तौर पर ही नहीं, वरन साथ ले जाकर उन्हें कुओं पर चढ़ायें. उनके बच्चों को स्कूलों में प्रवेश दिलायें. लेकिन जिस लेजिस्लेटिव असेम्बली में बाल-विवाह के विरुद्ध पेश किये बिल तथा मज़हब के बहाने हाय-तौबा मचायी जाती है, वहां वे अछूतों को अपने साथ शामिल करने का साहस कैसे कर सकते हैं?
इसलिए हम मानते हैं कि उनके अपने जन-प्रतिनिधि हों. वे अपने लिए अधिक अधिकार मांगें. हम तो साफ़ कहते हैं कि उठो, अछूत कहलाने वाले असली जन-सेवकों तथा भाइयों उठो! अपना इतिहास देखो. गुरु गोविन्द सिह की फ़ौज की असली शक्ति तुम्हीं थे! शिवाजी तुम्हारे भरोसे पर ही सबकुछ कर सके, जिस कारण उनका नाम आज भी ज़िन्दा है. तुम्हारी क़ुर्बानियां स्वर्णाक्षरों में लिखी हुई हैं. तुम जो नित्यप्रति सेवा करके जनता के सुखों में बढ़ोत्तरी करके और ज़िन्दगी सम्भव बनाकर यह बड़ा भारी अहसान कर रहे हो, उसे हम लोग नहीं समझते. लैण्ड-एलिएनेशन एक्ट के अनुसार तुम धन एकत्र कर भी ज़मीन नहीं ख़रीद सकते. तुम पर इतना ज़ुल्म हो रहा है कि मिस मेयो मनुष्यों से भी कहती हैं – उठो, अपनी शक्ति को पहचानो. संगठनबद्ध हो जाओ. असल में स्वयं कोशिशें किए बिना कुछ भी न मिल सकेगा. (Those who would be free must themselves strike the blow) स्वतन्त्रता के लिए स्वाधीनता चाहने वालों को स्वयं यत्न करना चाहिए. इंसान की धीरे-धीरे कुछ ऐसी आदतें हो गयी हैं कि वह अपने लिए तो अधिक अधिकार चाहता है, लेकिन जो उनके मातहत हैं उन्हें वह अपनी जूती के नीचे ही दबाये रखना चाहते हैं. कहावत है, ‘लातों के भूत बातों से नहीं मानते’. अर्थात संगठनबद्ध हो अपने पैरों पर खड़े होकर पूरे समाज को चुनौती दे दो. तब देखना, कोई भी तुम्हें तुम्हारे अधिकार देने से इंकार करने की ज़ुर्रत न कर सकेगा. तुम दूसरों की ख़ुराक मत बनो. दूसरों के मुंह की ओर न ताको. लेकिन ध्यान रहे, नौकरशाही के झांसे में मत फंसना. यह तुम्हारी कोई सहायता नहीं करना चाहती, बल्कि तुम्हें अपना मोहरा बनाना चाहती है. यही पूंजीवादी नौकरशाही तुम्हारी ग़ुलामी और गरीबी का असली कारण है. इसलिए तुम उसके साथ कभी न मिलना. उसकी चालों से बचना. तब सबकुछ ठीक हो जायेगा. तुम असली सर्वहारा हो…संगठनबद्ध हो जाओ. तुम्हारी कुछ हानि न होगी. बस ग़ुलामी की ज़ंजीरें कट जायेंगी. उठो, और वर्तमान व्यवस्था के विरुद्ध बग़ावत खड़ी कर दो. धीरे-धीरे होने वाले सुधारों से कुछ नहीं बन सकेगा. सामाजिक आन्दोलन से क्रान्ति पैदा कर दो तथा राजनीतिक और आर्थिक क्रान्ति के लिए कमर कस लो. तुम ही तो देश का मुख्य आधार हो, वास्तविक शक्ति हो, सोये हुए शेरो! उठो, और बग़ावत खड़ी कर दो.
काकीनाडा में 1923 में कांग्रेस-अधिवेशन हुआ. मुहम्मद अली जिन्ना ने अपने अध्यक्षीय भाषण में आजकल की अनुसूचित जातियों को, जिन्हें उन दिनों ‘अछूत’ कहा जाता था, हिन्दू और मुस्लिम मिशनरी संस्थाओं में बांट देने का सुझाव दिया. हिन्दू और मुस्लिम अमीर लोग इस वर्ग-भेद को पक्का करने के लिए धन देने को तैयार थे. उसी समय जब इस मसले पर बहस का वातावरण था, भगतसिह ने ‘अछूत का सवाल’ नामक लेख लिखा. इस लेख में श्रमिक वर्ग की शक्ति व सीमाओं का अनुमान लगाकर उसकी प्रगति के लिए ठोस सुझाव दिए गए हैं. भगतसिह का यह लेख जून, 1928 के ‘किरती’ में ‘विद्रोही’ के नाम से प्रकाशित हुआ था.
"दुनिया की सबसे महंगी गणेश प्रतिमा: कोहिनूर से भी महंगी, 1000 करोड़ रुपए के ऊपर की कीमत है"
आप सभी ने गणेशोत्सव के दौरान कई तरह की गणेश की मूर्तियां देखी होगी. विभिन्न भक्तों द्वारा श्रद्धा और क्षमता के अनुसार गणेश मूर्तियों की स्थापना की जाती है पर दुनिया में गणेश भगवान की एक मूर्ति ऐसी है, जिसकी कीमत 1000 करोड़ के ऊपर चली गई है. यह मूर्ति और कहीं नहीं सूरत में ही एक व्यक्ति के पास है.
हीरा का आकार गणेश भगवान की तरह
खास बात यह है कि यह मूर्ति किसी भी तरह से बनाई नहीं गई है. यह पूरी तरह से कुदरती तौर पर बनी है. कनु भाई आसोदारिया सूरत के डायमंड व्यवसाय से जुड़े हुए हैं और 2005 में जब रफ-डायमंड खरीद रहे थे, बेल्जियम में कच्चा हीरा खरीदते वक्त उन्हें यह हीरा मिला था, यह कुदरती हीरा अफगानिस्तान में मिला था. जिसका आकार गणपति की तरह है. उसके बाद से इस हीरे को भगवान की प्रतिमा ही मानकर कारोबारी ने अपने घर ही रख लिया.
उसी दौरान कनु भाई को एक गणेशजी के आकार का हीरा मिल गया. इस गणेश आकृति वाले डायमंड की खास बात यह थी कि इसमें नजर आ रही गणेश जी की आकृति सूंड दाईं तरफ नजर आ रही थी जो कि गणेश जी की मूर्तियों में नहीं होती है. गणेशजी की मूर्तियों में बाईं तरफ ही उनकी सूंड नजर आती है. कनु भाई ने बताया कि इस गणेश प्रतिमा को देखने के लिए करीब 25 देश से लोग आ चुके हैं.
कोहिनूर से भी महंगी है गणेश प्रतिमा
उन्होंने बताया कि कोहिनूर हीरा 104 कैरेट का होता है बल्कि गणेश प्रतिमा का मिला यह हीरा 184 कैरेट का है. ऐसे में इसकी कीमत भी करीब 1 हजार करोड़ रुपये तक आंकी गई है. हर साल गणेश चतुर्थी पर कनुभाई का पूरा परिवार इस हीरे से बने गणेश की पूजा प्रार्थना करते आये है. इस प्रतिमा को केवल गणेश चतुर्थी पर ही बाहर निकाला जाता है और उनकी पूजा की जाती है.
"जयपुर: 'गुलाबी शहर' का अद्भुत इतिहास और सौंदर्य"
जयपुर, राजस्थान की राजधानी, “गुलाबी नगर” के रूप में प्रसिद्ध है और यह भारत में एकमात्र ऐसा नगर है जिसकी योजना और निर्माण को किसी गढ़िया विशेषज्ञ की खूबसूरत कला कहा जाता है। जयपुर की गवर्नर, महाराजा सवाई जय सिंह द्वितीय ने इसे 18वीं सदी में नगर की योजना के साथ बनवाया था। शहर की सड़कों का नक्शा ग्रिड पैटर्न में बनाया गया है, जिससे यह खिलवाड़ से भरपूर दिखता है। शहर की उपनगरियाँ खिलौना की तरह दिखती हैं, जिनका प्रयोग दुर्गों और उनके पास रहने वाले लोगों की सुरक्षा में होता था।
जयपुर को “गुलाबी शहर” क्यों कहा जाता है?
मान्यता के अनुसार, जयपुर को पिंक शहर कहने का कारण यह है कि 1876 ईस्वी में महाराजा सवाई राम सिंह द्वितीय ने ब्रिटिश राज शासकीय परिषद सदस्यों के स्वागत के लिए शहर को गुलाबी रंग में रंगवाया था। इस समय, गुलाबी रंग शांति, मितव्यय, और सौभाग्य का प्रतीक माना जाता था, और महाराजा ने इसे ब्रिटिश साम्राज्य के साथीत्व और मित्रता की ओर एक प्रतीक के रूप में उपयोग किया। गुलाबी शहर का यह नाम समृद्धि और प्राकृतिक सौंदर्य की प्रतीकता के रूप में भी जाना जाता है। जयपुर में गुलाबी रंग की पत्थरों से बनी भव्य संरचनाएं, शानदार महल और हवेलियाँ, और साहसिक दरबार सभाएं हैं जो इस शहर की विशेषता को और भी प्रखर करती हैं।
इस तरीके से, जयपुर को “गुलाबी शहर” कहने का एक महत्वपूर्ण कारण यह है कि यह शहर अपने ऐतिहासिक, सांस्कृतिक, और सौंदर्यिक महत्व के लिए प्रसिद्ध है। जयपुर का एक और दिलचस्प तत्व है “हवा महल” जो एक अत्यंत विशेष निर्माण है। यह महल शहर के महाराजों को गरमियों में ठंडी हवा प्रदान करने के लिए डिज़ाइन किया गया था। इसमें 953 छोटी-बड़ी खिड़कियाँ हैं जिनसे ताज़ा और ठंडी हवा आती थी, और यह शहर की गरमियों में एक अद्वितीय अनुभव प्रदान करता था। इस रूप में, जयपुर अपने अद्वितीय शहरी निर्माण, गवर्नमेंट डिज़ाइन, और ऐतिहासिक धरोहर के साथ भारतीय सभ्यता और कला का महत्वपूर्ण हिस्सा बनता है।
"फेसबुक की प्राइवेसी पॉलिसी पर वायरल पोस्ट: आखिर क्या है सच्चाई ?"
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म फेसबुक पर पोस्ट की बाढ़ सी आ गई है, कई लोग फेसबुक पर धड़ाधड़ पोस्ट किए जा रहे हैं जिसमें इस बात का दावा हो रहा है कि कल से Facebook नए नियम लागू करने वाला है. इस पोस्ट के मुताबिक, फेसबुक का नया नियम आने के बाद कंपनी यूजर्स के फेसबुक डेटा जैसे कि नाम, तस्वीर, वीडियो और मोबाइल नंबर आदि का इस्तेमाल बिजनेस के लिए कर पाएगी. फेसबुक पर भेड़ चाल शुरू हो गई है, लोग एक-दूसरे के पोस्ट देखने के बाद खुद के टाइमलाइन पर धड़ाधड़ पोस्ट शेयर करने लगे हैं. जिसे देखो फेसबुक पर पोस्ट कर कंपनी को यही आदेश दे रहा है कि मेरा डेटा का इस्तेमाल नहीं किया जाए.
कौन सा पोस्ट हो रहा वायरल?
याद रखें कि कल से नया फेसबुक नियम (उर्फ… नया नाम मेटा) शुरू हो रहा है, जहां वे आपकी तस्वीरों का उपयोग कर सकते हैं. मत भूलो कि अंतिम तिथि आज है!!! मैं फेसबुक या फेसबुक से जुड़ी किसी भी इकाई को अपने अतीत और भविष्य के चित्रों, सूचनाओं, संदेशों या प्रकाशनों का उपयोग करने की अनुमति नहीं देता.
इस बयान के साथ, मैं फेसबुक को सूचित करता हूं कि इस प्रोफ़ाइल और/या इसकी सामग्री के आधार पर मेरे खिलाफ खुलासा, प्रतिलिपि, वितरण या कोई अन्य कार्रवाई करना सख्त वर्जित है निजता का उल्लंघन करने पर कानून द्वारा दंडित किया जा सकता है.
यदि आप चाहें तो आप इस संस्करण को कॉपी और पेस्ट कर सकते हैं यदि आप कम से कम एक बार कोई बयान प्रकाशित नहीं करते हैं तो यह चुपचाप आपकी तस्वीरों के उपयोग की अनुमति देगा, साथ ही आपकी प्रोफ़ाइल और स्थिति अपडेट में मौजूद जानकारी भी. सांझा ना करें. कॉपी और पेस्ट.
क्या है सच्चाई ?
दरअसल यह पोस्ट पूरी तरह से एक भेड़ चाल का हिस्सा है. किसी को सच्चाई की जानकारी नहीं है, लेकिन सभी लोग कॉपी-पेस्ट जरूर कर रहे हैं. फेसबुक ने इस तरह का कोई बयान जारी नहीं किया है. इस तरह का पोस्ट पहले भी वायरल हुई थी. 2022 में भी यही पोस्ट वायरल हुआ था. सबसे जरूरी बात यह है कि फेसबुक की पॉलिसी पर आपने पहले ही अपनी सहमति दे दी है. बिना सहमति आप फेसबुक को इस्तेमाल ही नहीं कर सकते. यदि आपके किसी डाटा का इस्तेमाल फेसबुक को करना होगा तो वह आपके आदेश का इंतजार नहीं करेगा. एक बात और कि इंटरनेट की दुनिया में इतना समझ लीजिए कि आपका निजी कुछ भी नहीं है जो भी है सार्वजनिक है.
"ध्यान दें: फोन कवर में नोट रखने से आ सकते हैं खतरे, जानें कैसे"
अक्सर आपने देखा होगा कि लोग पैसे रखने के लिए मोबाइल कवर का सहारा लेते हैं. हमें लगता है कि यहां नोट सेफ रहेगा और जब जरूरत पड़ेगी तो आसानी से कवर से निकालकर दे देंगे. लेकिन यह आदत खतरनाक साबित हो सकती है. इससे आपकी जान भी जा सकती है. जी हां, आपने सही सुना, फोन कवर में नोट रखने से आग लगने के चांसेस बढ़ जाते हैं.
हीट रिलीज़ नहीं हो पाती
फोन जब आप ज्यादा इस्तेमाल करते हैं तो आपने ध्यान दिया होगा कि वह गर्म हो जाता है. जैसे ही फोन गर्म होता है फोन का बैक साइड जलने लगता है. ऐसे में अगर आपने अपने फोन कवर के पीछे नोट रखा है तो फोन का हीट रिलीज़ नहीं हो पाता और इसकी वजह से वो ब्लास्ट हो सकता है. यही वजह है कि एक्सपर्ट्स कहते हैं कि फोन में ज्यादा टाइट कवर नहीं लगाना चाहिए, क्योंकि इसकी वजह से भी फोन ब्लास्ट हो सकता है.
नोट रखने से चार्जिंग और नेटवर्क में आती है समस्या
जब फोन लगातार इस्तेमाल किया जाता है या फिर चार्जिंग पर लगा होता है उस समय हीटिंग समस्या बढ़ जाती है. कवर के पीछे नोट रखे होने की वजह से इसे ठंडा होने पर भी काफी समय लगता है. और यही वजह से ही हमारा फोन ओवरहीट होने की वजह से ब्लास्ट कर जाता है.
स्मार्टफोन के बैक कवर पर रखे नोट सिर्फ हीटिंग का ही कारण नहीं बनते बल्कि इसकी वजह से कई बार फोन में नेटवर्क की समस्या भी आन लगती है. दरअसल ज्यादा तर स्मार्टफोन के बैक पैनल पर नेटवर्क के लिए एंडिया दिया जाता है और नोट रखे होने के वजह से फोन पर प्रॉपर नेटवर्क नहीं आ पाता.